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मैं तेरा मुंतज़िर हूँ

मैं तेरा मुंतज़िर हूँ मुस्कुरा के मिल कब तक तुझे तलाश करूँ अब आ के मिल यूं मिल के फिर जुदाई का लम्हा न आ सके जो दरमियाँ में है सभी कुछ मिटा के मिल