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क्यूँ किसी – Love Shayari

क्यूँ किसी से इतना प्यार हो जाता है, एक दिन का भी इंतजार दुश्वार हो जाता है, लगने लगते है अपने भी पराए, जब एक अजनबी पर ऐतबार हो जाता है।

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नजरों को तेरे प्यार

नजरों को तेरे प्यार से इंकार नहीं है, अब मुझे किसी और का इंतज़ार नहीं है, खामोश अगर हूँ मैं तो ये वजूद है मेरा तुम ये न समझना कि तुमसे प्यार नहीं है।

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नजर से क्यूँ

नजर से क्यूँ जलाते हो आग चाहत की, जलाकर क्यूँ बुझाते हो आग चाहत की, सर्द रातों में भी तपन का एहसास रहे, हवा देकर बढ़ाते हो आग चाहत की।

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तेरे शहर में

तेरे शहर में आ कर बेनाम से हो गए, तेरी चाहत में अपनी मुस्कान ही खो गए, जो डूबे तेरी मोहब्बत में तो ऐसे डूबे, कि जैसे तेरी आशिक़ी के गुलाम ही हो गए।