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यूँ ही बेवजह

यूं ही बेवजह कोई कलम नहीं चलाता है जनाब, किसी की तस्वीर तसब्बुर मे होती जरूर है…. अल्फाज यूं ही नहीं आते हैं जहन में, किसी का ख्याल तसब्बुर में होता जरूर है… भले ही बेपरवाह हो हमसफर हमकदम उसका, महक महबूब की तसब्बुर में होती जरूर है…

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मस्तीखोर

इंसान को थोडा “मस्तीखोर” रहना चाहिये…!! सीरियस ” लोग तो हॉस्पिटल में भी मिलते है….!! 😝Enjoy The Life😝

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चले आओ

चले आओ मेरी कलम की स्याही बनकर, तुम्हें अपनी जिन्दगी के हर पन्ने में उतार दूं….✍️ 😀

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राह संघर्ष की

राह संघर्ष की जो चलता है…., वो ही संसार को बदलता हैं। जिसने रातों से है, जंग जीती…., सुबह सूर्य बनकर, वही चमकता है।

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मैं औरत हूँ

“मैं औरत हूँ” इसलिए कभी नहीं थकतीमैं सबके जागने से पहले जागती हूँमैं सबके सोने के बाद सोती हूँक्योंकि मैं एक “औरत” हूँइसलिए कभी नहीं थकतीसुबह गृहस्थी में सिमट जाती हैदोपहर फाइलों के बण्डल में