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आह को चाहिए

आह को चाहिये एक उम्र असर होने तक ! कौन जीता है तेरे जुल्फ के असर होने तक !! हमने माना की तगफ्फुल ना करोगे लेकिन ! खाक हो जायेंगे हम तुमको खबर होने तक !!

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कभी हस लिये

कभी हस लिये तो कभी मुस्कुरा दिये।जब हुए उदास तन्हाई मे रो लिये।।सुनाने से दास्तां अपनी, अपनी ही रुसवाई थी।कुछ छुपा ली हमने, कुछ पन्नो पे सजा दिये।।

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सब कुछ है नसीब में

सब कुछ है नसीब में, तेरा नाम नहीं है  दिन-रात की तन्हाई में आराम नहीं हैमैं चल पड़ा था घर से तेरी तलाश में  आगाज़ तो किया मगर अंजाम नहीं हैमेरी खताओं की सजा अब मौत ही सही  इसके सिवा तो कोई भी अरमान नहीं हैकहते हैं वो मेरी तरफ यूं उंगली उठाकर  इस शहर […]

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एक ग़ज़ल तेरे लिए

एक ग़ज़ल तेरे लिए ज़रूर लिखूंगा,बे-हिसाब उस में तेरा कसूर लिखूंगा,टूट गए बचपन के तेरे सारे खिलौने,अब दिलों से खेलना तेरा दस्तूर लिखूंगा।