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आसमान पे चाँद

आसमान पे चाँद जल रहा होगा, किसी का दिल मचल रहा होगा, उफ़ ये मेरे पैरों में चुभन कैसी है, जरूर वो काँटों पर चल रहा होगा।

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आरजू तमाम

आरजू तमाम पिघलने लगी हैं,लो और एक शाम फिर से ढलने लगी है,हसरत-ए-मुलाकात का शौक है बस,ये ज़िद भी तो हद से गुजरने लगी है |

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माना कि तुम

माना कि तुम जीते हो ज़माने के लिये, एक बार जी के तो देखो हमारे लिये, दिल की क्या औकात आपके सामने, हम तो जान भी दे देंगे आपको पाने के लिये |

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रग-रग में इस तरह

रग-रग में इस तरह से समा कर चले गये, जैसे मुझ ही को मुझसे चुराकर चले गये, आये थे मेरे दिल की प्यास बुझाने के वास्ते, इक आग सी वो और लगा कर चले गये।