Posted on

कहीं दिन उगा – Life Shayari

कहीं दिन उगा तो कहीं रात हो गयीकभी कुछ न बोले, कभी बात हो गयीकहीं दूर तलक न साये दिखेकहीं दूर सफर तक साथ हो गयीकभी डरती डरती चली थी सफर मेंअब चलते चलते बेबाक हो गयी

Posted on

सफर की हद

सफ़र की हद है वहां तक की कुछ निशान रहे, चले चलो की जहाँ तक ये आसमान रहे, ये क्या उठाये कदम और आ गयी मंजिल, मज़ा तो तब है के पैरों में कुछ थकान रहे