Posted on

नजर से क्यूँ

नजर से क्यूँ जलाते हो आग चाहत की, जलाकर क्यूँ बुझाते हो आग चाहत की, सर्द रातों में भी तपन का एहसास रहे, हवा देकर बढ़ाते हो आग चाहत की।