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आह को चाहिए

आह को चाहिये एक उम्र असर होने तक ! कौन जीता है तेरे जुल्फ के असर होने तक !! हमने माना की तगफ्फुल ना करोगे लेकिन ! खाक हो जायेंगे हम तुमको खबर होने तक !!

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खूबसूरत लम्हें

गुज़र जाते हैं …..खूबसूरत लम्हें …. यूं ही मुसाफिरों की तरह….यादें वहीं खडी रह जाती हैं ….. रूके रास्तों की तरह…एक “उम्र” के बाद “उस उम्र” की बातें” उम्र भर” याद आती हैं..पर “वह उम्र” फिर “उम्र भर” नहीं आती..।