आरजू तमाम ShayariArt 7 years ago Home » Hindi Shayari » Judai Shayari » आरजू तमाम Facebook Twitter Digg Pinterest आरजू तमाम पिघलने लगी हैं,लो और एक शाम फिर से ढलने लगी है,हसरत-ए-मुलाकात का शौक है बस,ये ज़िद भी तो हद से गुजरने लगी है |