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यूँ ही बेवजह


यूं ही बेवजह कोई कलम नहीं चलाता है जनाब,
किसी की तस्वीर तसब्बुर मे होती जरूर है….
अल्फाज यूं ही नहीं आते हैं जहन में,
किसी का ख्याल तसब्बुर में होता जरूर है…
भले ही बेपरवाह हो हमसफर हमकदम उसका,
महक महबूब की तसब्बुर में होती जरूर है…

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