यह तो “महाकाल” है.

यह तो "महाकाल" है. - Hindi Shayari for God Shiv Shankar
ये काल है,कराल है, चन्द्र इसके भाल है
  खोलदी जटा छटा तो, देख लो विशाल है,
नंदी के सवार नंदी, दौड़ता अपार पार
  रोके कौन,टोके कौन, किसकी येे मजाल है ?
ये प्रलय सी चाल है, और गले में व्याल है
  धरा गगन है डोलते, सुन के डमरू ताल है,
दिशा-दिगंत डोलते, गगन से देव, बोलते
  ये सिद्ध है,ये रुद्र है, अरे यह तो “महाकाल” है..!!

हे मुरलीधर छलिया

Krishna Bhakti Shayari in Hindi
हे मुरलीधर छलिया मोहन, हम तुमको दिल दे बैठे,
  गम पहले ही क्या कम थे, इक और मुसीबत ले बैठे…
मन कहता है तुम सुन्दर हो, आँखें कहतीं है दिखलाओ,
  तुम मिलते नहीं हो आकर के, हम कैसे कहें ये बैठे…
हे मुरलीधर, छलिया मोहन, हम तुमको दिल दे बैठे,
  गम पहले ही क्या कम थे, इक और मुसीबत ले बैठे…
महिमा सुन कर हैरान हैं हम, तुम मिल जाओ तो चैन मिले,
  मन खोजकर भी तुमको पाता नहीं है, तुम खोकर उसी मन में हो बैठे…
हे मुरलीधर छलिया मोहन, हम तुमको दिल दे बैठे,
  गम पहले ही क्या कम थे, इक और मुसीबत ले बैठे…
कृष्ण तुम्हीं और राम तुम्हीं प्रभु , योगेश्वर तुम्हीं, घनश्याम तुम्हीं,
  धन्य भागी बने हम भी कभी, जो मिल जाओ यमुनातट पे बैठे…
हे मुरलीधर छलिया मोहन, हम तुमको दिल दे बैठे,
  गम पहले ही क्या कम थे, इक और मुसीबत ले बैठे…